राष्ट्रीय बजट: राष्ट्र निर्माण की रीढ़

बजट शब्द सुनते ही हमारे दिमाग में आंकड़ों का खेल, सरकार की आय-व्यय का लेखा-जोखा घूमने लगता है। लेकिन क्या सिर्फ इतना ही है बजट? बिल्कुल नहीं! दरअसल, बजट एक दस्तावेज से कहीं अधिक है। यह एक आईना है, जिसमें राष्ट्र की आर्थिक दशा, उसकी प्राथमिकताएं, भविष्य की राह और विकास का रास्ता झलकता है।

इसलिए, जब हम बजट की बात करते हैं, तो सिर्फ सरकारी खजाने के खुलने-बंद होने की खबर नहीं सुन रहे होते, बल्कि राष्ट्र निर्माण की नींव रखने, मजबूत करने और उस पर भविष्य का भवन खड़ा करने की योजना को समझ रहे होते हैं। इस लेख में, हम बजट के पहलुओं, भारत में बजट बनाने की प्रक्रिया, उसके महत्व से जुड़ी उम्मीदों पर गहन दृष्टि डालेंगे।

बजट: परिभाषा और प्रकार

बजट मूल रूप से फ्रांसीसी भाषा के शब्द “bougette” से आया है, जिसका अर्थ होता है “छोटा थैला”। आर्थिक संदर्भ में, यह सरकार की अनुमानित आय और व्यय का एक विस्तृत विवरण है। इसमें सरकार को मिलने वाले कर, शुल्क, अन्य स्रोतों से होने वाली आमदनी और विभिन्न क्षेत्रों और कार्यक्रमों पर होने वाले खर्च का ब्योरा होता है।

बजट को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जा सकता है:

  • राजस्व बजट: यह सरकार की नियमित आय और व्यय का लेखा-जोखा करता है। इसमें कर, शुल्क, सरकारी कंपनियों का लाभांश आदि से होने वाली आय और प्रशासनिक खर्च, वेतन, सब्सिडी आदि शामिल हैं।
  • पूंजीगत बजट: यह सरकार की परिसंपत्तियों के अधिग्रहण, निर्माण और रख-रखाव से संबंधित आय और व्यय का लेखा-जोखा करता है। इसमें सड़क, पुल, बांध आदि का निर्माण, भवनों का रख-रखाव, नई मशीनें खरीदना आदि शामिल हैं।

बजट के मुख्य घटक

बजट को आम तौर पर तीन मुख्य घटकों में बांटा जा सकता है:

  • आय: इसमें सरकार को विभिन्न स्रोतों से प्राप्त होने वाली राशि का विवरण होता है, जैसे कर, शुल्क, लाभांश आदि।
  • व्यय: इसमें सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों और योजनाओं पर खर्च की जाने वाली राशि का विवरण होता है।
  • राजकोषीय घाटा: यह सरकार की आय और व्यय के बीच का अंतर होता है। यदि व्यय आय से अधिक है, तो इसे राजकोषीय घाटा कहा जाता है।

भारत में बजट बनाने की प्रक्रिया

भारत में, वित्त मंत्री हर साल 1 फरवरी को संसद में अगले वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) के बजट को पेश करते हैं। यह एक लम्बी और विस्तृत प्रक्रिया होती है, जिसमें कई स्तर शामिल होते हैं।

  • आर्थिक सर्वेक्षण: वित्त मंत्रालय हर साल बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण जारी करता है। इसमें पिछले साल के आर्थिक प्रदर्शन का आकलन और अगले साल के लिए आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति आदि के आसार पेश किए जाते हैं।
  • विभागीय स्तर पर बजट तैयार करना: विभिन्न विभाग और मंत्रालय अपनी जरूरतों और योजनाओं के हिसाब से बजट का खाका तैयार करते हैं।
  • विभागीय बजटों का समेकन: सभी विभागीय बजटों को वित्त मंत्रालय में मिलाकर समेकित बजट तैयार किया जाता है।
  • मंत्रिमंडल की मंजूरी: समेकित बजट को अंतिम रूप देने से पहले मंत्रिमंडल की मंजूरी ली जाती है।
  • संसद में बजट पेश करना: वित्त मंत्री संसद में बजट पेश करते हैं और इस पर गहन चर्चा होती है।
  • बजट पारित होना: संसद द्वारा बजट पारित होने के बाद ही इसे लागू किया जा सकता है।

बजट का व्यक्तिगत जीवन पर प्रभाव

बजट आम आदमी के जीवन को कई तरह से प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, सरकार द्वारा करों में छूट या वृद्धि का सीधा असर हमारे आय पर पड़ता है। इसके अलावा, बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक कल्याण आदि क्षेत्रों के लिए आवंटित राशि का असर हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं पर भी पड़ता है।

उदाहरण के लिए, यदि सरकार शिक्षा क्षेत्र पर अधिक खर्च करती है, तो इससे स्कूलों में बुनियादी ढांचे में सुधार, शिक्षकों की भर्ती और छात्रवृत्ति योजनाओं का विस्तार हो सकता है। इसी तरह, स्वास्थ्य क्षेत्र पर अधिक खर्च से अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं और दवाइयों की उपलब्धता बढ़ सकती है।

बजट का महत्व

  • विकास को रफ्तार देना: बजट सरकार को राष्ट्रीय विकास के लिए प्राथमिकताएँ निर्धारित करने और उन पर धन आवंटित करने में मदद करता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बुनियादी ढांचा आदि जैसे क्षेत्रों में निवेश करके सरकार देश की विकास दर को बढ़ाने में सहायक होती है।
  • गरीबी उन्मूलन: बजट सरकार को गरीबी उन्मूलन के लिए योजनाओं और कार्यक्रमों पर धन आवंटित करने में मदद करता है। सब्सिडी, रोजगार सृजन योजनाएं, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार आदि गरीबी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • सामाजिक न्याय: बजट सरकार को सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में मदद करता है। वंचित वर्गों के लिए आरक्षण, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में समान पहुंच, गरीबों को आर्थिक सहायता प्रदान करना आदि सामाजिक न्याय के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
  • राजकोषीय अनुशासन: बजट सरकार को अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने में मदद करता है। सरकार को अपनी आय के दायरे में रहकर खर्च करना होता है, जिससे अर्थव्यवस्था में स्थिरता और निश्चितता बनी रहती है।

अतिरिक्त बिंदु:

  • बजट में विभिन्न क्षेत्रों और कार्यक्रमों के लिए धन आवंटित करते समय सरकार को विभिन्न हितधारकों के विचारों और सुझावों पर ध्यान देना चाहिए।
  • बजट पारदर्शी और जवाबदेह होना चाहिए।
  • सरकार को बजट में किए गए वादों को पूरा करने का प्रयास करना चाहिए।
  • नागरिकों को बजट को समझने और उसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

बजट राष्ट्र निर्माण की रीढ़ है। यह सरकार को अपनी नीतियों और योजनाओं को लागू करने और देश के विकास और समृद्धि को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आगामी बजट को लेकर देशवासियों में काफी उम्मीदें हैं। सरकार को इन उम्मीदों पर खरा उतरने और एक ऐसा बजट पेश करने की आवश्यकता है जो देश को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाए।

अंत में, यह कहना उचित होगा कि बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण साधन है।

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