कर-आस्थगित बचत योजनाओं को समझें

आप मेहनत करते हैं, कमाते हैं, लेकिन रिटायरमेंट के बारे में सोचकर कभी-कभी परेशानी होते है ना? ज़िंदगी भर की कमाई रिटायरमेंट के बाद खर्च के लिए पर्याप्त होगी या नहीं, यह चिंता हर किसी को सताती है। मगर घबराने की जरूरत नहीं है, अगर आप आज से ही स्मार्ट फाइनेंशियल प्लानिंग शुरू कर देते हैं, तो अपना सुनहरा भविष्य खुद बना सकते हैं।

इस लेख में हम कर-आस्थगित बचत योजनाओं (Tax-Deferred Savings Plans) के बारे में विस्तार से बात करेंगे। ये योजनाएं न सिर्फ आपके रिटायरमेंट के लिए बचत करने में मदद करती हैं, बल्कि टैक्स में भी छूट दिलवाती हैं।

तो चलिए, गहराई से समझते हैं कि कर-आस्थगित बचत योजनाएं क्या हैं और ये आपके रिटायरमेंट प्लानिंग में कैसे आपकी मदद कर सकती हैं।

कर-आस्थगित बचत योजनाएं क्या हैं?

कर-आस्थगित बचत योजनाएं ऐसे निवेश विकल्प होते हैं, जिनमें आप अपने वेतन का एक हिस्सा जमा करते हैं। इस जमा राशि पर आपको उस वित्तीय वर्ष में टैक्स नहीं देना होता है। जमा की गई राशि और उस पर मिलने वाला ब्याज निवेश अवधि के दौरान टैक्स के दायरे में नहीं आता। हालांकि, जब आप रिटायरमेंट के बाद इस राशि को निकालते हैं, तो तब उस पर टैक्स लगता है।

कर-आस्थगित बचत योजनाओं के फायदे

टैक्स में छूट: सबसे बड़ा फायदा तो यही है कि इन योजनाओं में निवेश करने पर आपको टैक्स में छूट मिलती है। आप जितनी राशि निवेश करते हैं, उतनी राशि आपकी कर योग्य आय से कम हो जाती है, जिससे आप कम टैक्स चुकाते हैं।

ब्याज पर चक्रवृद्धि लाभ (Compound Interest): ज्यादातर कर-आस्थगित बचत योजनाओं में चक्रवृद्धि लाभ का फायदा मिलता है यानी, हर साल आपके निवेश पर मिला ब्याज भी अगले साल के ब्याज गणना में जुड़ जाता है, जिससे आपकी कुल बचत राशि काफी बढ़ जाती है।

अनुशासन बनाए रखने में सहायक: इन योजनाओं में नियमित रूप से निवेश करना होता है, जो आपको बचत करने की आदत डालने में मदद करता है।

सेवानिवृत्ति नियोजन: ये योजनाएं सेवानिवृत्ति के लिए बचत करने का एक शानदार तरीका हैं। सेवानिवृत्ति के बाद आपकी आय कम हो जाने की संभावना है, इसलिए कर-आस्थगित बचत योजनाएं आपको आर्थिक रूप से सुरक्षित रहने में मदद करती हैं।

भारत में लोकप्रिय कर-आस्थगित बचत योजनाएं

भारत में कई तरह की कर-आस्थगित बचत योजनाएं उपलब्ध हैं (Popular Tax-Deferred Savings Plans in India) आइए, कुछ प्रमुख योजनाओं के बारे में तालिका के माध्यम से समझते हैं:

योजना का नामनिवेश की सीमा (वार्षिक)परिपक्वता अवधि (लॉक-इन पीरियड)टैक्स छूट धारा
लोक भविष्य निधि (PPF)₹1.5 लाख15 वर्षधारा 80C
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF)कंपनी द्वारा तय राशि (आपके वेतन का एक हिस्सा)रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने परधारा 80C
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS)₹1.5 लाख (स्वैच्छिक) + ₹50,000 (अतिरिक्त छूट)60 वर्षधारा 80CCD (1B)
सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana)₹1.5 लाख21 वर्ष (बालिका के 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर आंशिक निकासी)धारा 80C

इन योजनाओं को चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें?

  • आपकी आयु: कम उम्र से ही निवेश शुरू करना फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे आपको चक्रवृद्धि लाभ का अधिक लाभ मिलता है।
  • आपकी आय: अपनी आय और खर्च के आधार पर ही निवेश की राशि तय करें।
  • आपके निवेश लक्ष्य: रिटायरमेंट के अलावा, आप इन योजनाओं का उपयोग शिक्षा, घर खरीदने, या किसी अन्य लक्ष्य के लिए भी कर सकते हैं।
  • जोखिम सहने की क्षमता: विभिन्न योजनाओं में जोखिम का स्तर अलग-अलग होता है। अपनी जोखिम सहने की क्षमता के अनुसार योजना चुनें।
  • कर लाभ: विभिन्न योजनाओं में मिलने वाले टैक्स लाभों की तुलना करें।
  • लॉक-इन पीरियड: अपनी जरूरतों के अनुसार योजना चुनें, जिसमें लॉक-इन पीरियड आपके लक्ष्य के अनुरूप हो।

निष्कर्ष:

कर-आस्थगित बचत योजनाएं रिटायरमेंट के लिए बचत करने का एक शानदार तरीका है। टैक्स में छूट और चक्रवृद्धि लाभ के साथ, ये योजनाएं आपको अपनी बचत को तेजी से बढ़ाने में मदद करती हैं। अपनी जरूरतों और लक्ष्यों के आधार पर योजना चुनें और आज से ही निवेश शुरू करें।

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